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ये घुटन


ये घुटन सदियों से इन लफ़्ज़ों में समायी हैबात ना कर ये पल भर की इश्क की रुसवाई है

और बग़ैर रास्तों के हम चलते रहे बयाबाँ मेंअश्कों से किये हैं तर हर मौसम तब बहार आयी है...

— Rashid Ali Ghazipuri
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