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लिहाफ़े बशर


लिहाफ़े बशर में फिर रहा हूँ मैंबेरंग ही इन गलियों से गुज़र रहा हूँ मैं

तवाफ़ ए इश्क़ मुयस्सर ना हुआ अब तकरूह से रूह की क़ल्ब में भटक रहा हूँ मैं...

— Rashid Ali Ghazipuri
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