लिहाफ़े बशर में फिर रहा हूँ मैंबेरंग ही इन गलियों से गुज़र रहा हूँ मैंतवाफ़ ए इश्क़ मुयस्सर ना हुआ अब तकरूह से रूह की क़ल्ब में भटक रहा हूँ मैं...
लिहाफ़े बशर में फिर रहा हूँ मैंबेरंग ही इन गलियों से गुज़र रहा हूँ मैं
तवाफ़ ए इश्क़ मुयस्सर ना हुआ अब तकरूह से रूह की क़ल्ब में भटक रहा हूँ मैं...