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कुछ लफ्ज


कुछ लफ्ज ही काफी हैंहर रुख बदलने को

झूठे चेहरों के हर सिम्त उधड़ने कोचमक ये झूटी है सब यकसां चेहरे की

— Rashid Ali Ghazipuri
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