दिल में एक क़तरा है जो समन्दर सा हैखुद में ही डूब जाने को अब मन सा हैतलाश करें भला अब क्यूँ जो आरज़ी हैरूह के क़ल्ब में उतर जाने को बेक़ल सा है
दिल में एक क़तरा है जो समन्दर सा हैखुद में ही डूब जाने को अब मन सा है
तलाश करें भला अब क्यूँ जो आरज़ी हैरूह के क़ल्ब में उतर जाने को बेक़ल सा है