खिड़कियों पे जालीयों का पहरा हैं
दूर बैठे झाँकता कोई चेहरा हैं
ज़रा इत्मीनान रखो राज़ ये गहरा हैं
सीपियों में चाँद आज ठहरा हैं
इश्क़ का सफर यु तो सुनेहरा हैं
दिल की सतह पर ख़ूनी परचम लहरा हैं
इन रेशमी फिज़ाओ में खौफनाक कोहरा हैं
काली रातों से घिरा मगर अश्कों में सवेरा हैं
खिड़कियों पे जालीयों का पहरा हैं