बेपनाह प्यार
मोहब्बत में इख़्तियार मत करना तुम
प्यार तो करना लेकिन बेशुमार करना तुम
क़ातिलों की दुनिया में वो बेपनाह प्यार करे
ज़ाहिदों की देहलीज़ पार कर बेझिझक श्रृंगार करे
असरारो से घिरा गौहर जैसा माशूक़ उसका
लहरों में लिपटकर आशियाँ गुलज़ार करे
इस रात की तन्हाई में कोई हमें याद करने वाला नहीं,
रेशमी ज़ंजीरो में बंधे हम किसका दीदार करे
इश्क़ करने वालो को रोका ना जाएँ, टोका ना जाएँ
कफ़स में जकड़े परिंदो को देखकर यही मिन्नतें हज़ार करे
खिलखिलाती कलियों जैसे हर ख्वाब हो गए रेज़ा रेज़ा
डूबती है कश्ती मगर साहिल का इंतज़ार करे