सदियों से जिस दरख़्त को सींच रहा था


उस दरख़्त को तूने ही खरवतवार कर दिया


बना के आशियाना उसका उसे नीलाम कर दिया


कुछ सोचा होता जीवों के आसरे के लिए तो सारी कायनात तेरी होती


काट के दरख्तों को उन्हे भी घर से आवारा कर दिया।


Ranjeet✍️ ✍️