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माशूक


लब-ओ-रुक्सार जरूरी है तेरे शफ्फाक चेहरे के लिए,एहतिराम तेरी अदायों में खूब दिखता है,

बज़्म में प्याले लबों के छलकाए जा रहे हो,गर रुक्सार ना हो जाए माशूक की आंखों से।।

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