यूँ तो तबाह कर दी है मुक्कमल थी जो मोहब्बत मेरी,


आंसुओ जा सैलाब गुजर गया है सुर्ख होठों से तेरे,


उम्मीद जेहन में अब भी कायम है रगों में मेरे,


तेरा छोड़कर फिर छोड़ने आ जाना बाकी है जेहन में मेरे।।


जाना इस बार छोड़कर फिर से तो आना एक वार फिर से,


मोहब्बत का ये किस्सा जो मेरे पास है गर हो ना तेरे पास,


दिन भी बड़े अजीब थे जब थे मेरे पास तुम,


बातों में निकल जाते थे दिन हाथों में हाथ थे जब तेरे और मेरे,


तेरे चौराहे पे ही दम तोड़ दूंगा है फ़क़त अब जेहन में मेरे,


गर खता हुई है तो इंकार कियूं करते हो पाक जुबां पे,


मेरा भी ना रहा ये शहर जो तूने दूर किया,


तेरा भी कंहा था ये शहर जिसे तूने अपना कहा था,


कलम अब यंही रुक जाए हाथ दुख गए दस्ता कहते कहते,


फक्र मुक्कमल मोहब्बत न हो सकी दस्ता अब भी जारी है।