
कहते है नारी
एक अबझू पहेली-सी है
नारी को कोई समझा है
ना समझ पायेगा
ऋषि मुनि नहीं समझे
साधारण मानव कहा समझ पायेंगा
जब वो रोती है
चिल्लाती है
शिकायतें हज़ार करती है
तब हक़्क़ तुम पर
वो अपना निसार करती है
हर पल जो वो बिखरती है बाहों में अपने प्यार के
तो अपने समर्पण पर ऐतबार करती है
प्यार पर इठलाती है अपने
बात बात पर रूठ जाती है जब
चुपके से इज़ह
Read More! Earn More! Learn More!
