आंसुओं में घुल कर सोने का मन है
ना कोई मुझे समझा ना मैं ही समझा पाया
धोखा दिया भी है और खुद भी है खाया
तुम्हारी यादों के नए बीज बोने का मन है
आज फिर मेरा खुल कर रोने का मन है
दिन भर करता संगीत हंसने का दिखावा
मेरी जिंदगी को उसने बना दिया है छलावा
फिर भी सबकुछ उसपर खोने का मन है
आज फिर मेरा खुल कर रोने का मन है
