नारी हूँ मैं
देवी हूँ
प्रेम की अभिव्यक्ति हूँ
मैं फूल-सी कोमल हूँ;
और सिंहनी की तरह हिंसक भी हूँ।
मैं अंश हूँ उन वीरांगनाओं का;
जो मृत्यु रूपी अमृत पी गयी,इस माता स्वरुप भूमि के लिए।
साहसी हूँ मैं
स्वाधीन हूँ
परिवार का स्तम्भ हूँ;
मैं शिशुओं की आवाज़ का समाधान हूँ;
मैं भवन की स्वच्छता का अनुरुप हूँ;
मैं माता-पिता का अनुराग हूँ;
मैं शिक्षा का नया विशाल पाठ हूँ।
उत्तरदायी हूँ मैं
पोषण की आधार शिला हूँ;
हस्त व्यस्त कर कार्यों में भी ,चंद्रमा-सी शीतल हूँ;
दिन-भर तप के सूर्य की तरह सब को दैदीप्यमान करती हूँ;
मात-पिता की लाठ हूँ, बच्चों का अभिमान हूँ।
नारी हूँ मैं
देवी हूँ
प्रेम की अभिव्यक्ति हूँ।
-आमना
