बाबा, मेरा सौदा करोगे तुम
न मानी तो कुछ खा मरोगे तुम
एक अर्थी सजी होगी सपनों की मेरे,
उस बारात में
मुझे हंसके विदा करोगे तुम
तेरी उसी हंसी के लिए जिंदा हूं शायद
तेरी झूठी आबरू का बौझ लिए बैठी हूं
मेरे बाबा, में चैन से सो नहीं पाती
बेशक प्यार दिखाते हो मगर व्यापारी हो तुम
तेरे आंचल से लगके, मैं अब रो नहीं पाती।
तुमने कैसे सोच लिया हमें उससे मोहब्बत हो जाएगी,
कुछ दिनों में उसकी आदत हो जाएगी
अब तक हुक्म तुम्हारा है हर एक कदम मेरा,
कल से सांस लेना उसकी इजाजत हो जाएगी
शायद मेरी किस्मत में नहीं, खुद की मर्जी से जीना
मैं समझती हूं, आंखें भिगो नहीं पाती।
झूठा प्यार दिखा कर रोज मारते हो मुझे
जिंदा होकर भी मैं जिंदा हो नहीं पाती।
खैर, मैंने सुनी है कहानियां उनकी, जो किस्मत बदल गए,
रूई के नीचे एक चिंगारी जल रही थी आहिस्ता आहिस्ता
जब लपटें उठी तो गांव के गांव जल गए।
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नादान


