तू सोई हुई है और मैं तेरी जुल्फें संवार रहा हूँ,

तेरी जान-ए-अदा को देख मैं ये दिल हार रहा हूँ।


ख्वाब है मेरा बस तू इसी तरह नींद में रहे,

सिर्फ एक तबस्सुम खातिर मैं पूरी रात बेदार रहा हूँ।


तुम रात थी और तुम्हारा चेहरा एक चांद सा,

बैठ तेरे ही गली में मैं तुझे ही निहार रहा हूँ।


वैसे तो नवाजिशें मयस्सर थी तेरी भी बहुत,

उम्र-ए-दराज़ के चाहत में खुद को पतवार कर रहा हूँ


मुबतादि है ये राम इस शायरी की दुनिया में,

बयां-ए-इश्क में तेरे ये ग़ज़ल आबशार

कर रहा हूँ।