तेवरी

*************

सब चिन्तन में आज महान

कड़वे को बोलें मिष्ठान। क्या कहने!!

आज रचाया उसने ब्याह

जिसको बोली ' भाईजान'। क्या कहने!!

अजब जागरण का ये दौर

सब सोये हैं चादर तान । क्या कहने!!

जगा दिया उसने विश्वास

उगे हुए मरुथल में धान । क्या कहने!!

सच की निकल रही है चीख़

लोग बोलते-"मीठा गान" । क्या कहने!!

*रमेशराज