तेवरी
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हिंसा आगज़नी के काम
कोई रोके क़त्लेआम। उसे सलाम।।
सब में जाग रहा उन्माद
अमन-भरे लाये पैग़ाम। उसे सलाम।।
रखकर सदभावों के दीप
तम का कर दे काम तमाम। उसे सलाम।।
आग-भरे हों जिसके छंद
जिसका तेवरदार क़लाम। उसे सलाम।।
नित असुरों से जिसकी जंग
ऐसा पौरुष जिसके नाम। उसे सलाम।।
*रमेशराज
