तेवरी
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ये है गुलशन का अब हाल
डाल-डाल बैठे वैताल।सब बेहाल।।
सबके मन का खोया चैन
सबके चेहरे सूखे ताल। सब बेहाल।।
भूख, ग़रीबी, हिंसा, रेप
सिसकन क्रंदन पूरे साल। सब बेहाल।।
निकल रहा है सबका तेल
टीसे सब्जी,चीनी, दाल। सब बेहाल।।
कब आएगा मधुर बसन्त?
सबके मन में यही सवाल। सब बेहाल।।
*रमेशराज

