पल पल छिलती सांसों में भी नाम तुम्हारा अटका है,
इन सांसों की माला में जप तुम्हारा अटका है।
है दूर भले ही तो भी तो क्या,
दिल पास मेरे ही अटका है।
खुली डोर सी आहटों पर नाम तेरा ही अटका है,
बारिश की बिखरती बूंदों सा बस जिक्र तेरा ही बिखरा है।
तू भी अजीब सी दास्तां है,
यहां किस्सा तुम्हारा अटका है।
जरा होठ फैला के मुस्करा दे,
बस दीदार तुम्हारा अटका है।
