कहानी हमारी अधूरी ही रह गई

मुकम्मल करने को

कभी शब्द कम पड़ गए कभी वक़्त ।

हर रात तेरे ख़यालों से सजती,

कभी सपने छोटे पड़ गए,

कभी रात।

हर सुबह तेरे होने से चलते,

कभी राहें छोटी पड़ गयी,

कभी तेरा साथ।

हर जगह सिर्फ तुम्हे ढूंढते,

कभी चेहरे कम पड़ गये,

कभी नजरों का साथ।