आज बादल के साथ रोयें हम
आज घेरे है मुझको तेरा ग़म

छू लूँ इन हाथों से जो अक्स तेरा
धीमे धीमे है चढ़ता तेरा ग़म

रूह शादाब हो जो तेरी याद
दिल हो पुर-नूर जो हो तेरा ग़म

छोड़ा सब कुछ है जा के दैर-ओ-हरम
फिर भी छूटा न मुझसे तेरा ग़म

ख्वाहिशों का जनाज़ा उठने लगा
दर पे बैठा रहा वो तेरा ग़म

दिल-ए-मरहूम जल गया लेकिन
राख से महके फिर भी तेरा ग़म

ये "रमन" खो चली ख़मोशी में
गूंजे हर-सू बस ये तेरा ग़म

-Rमन

शादाब : तृप्त
पुर-नूर : रोशन
दैर-ओ-हरम : मंदिर और मस्जिद
दिल-ए-मरहूम : मृतक दिल
हर-सू : हर तरफ़