उसके हर लफ्ज़ में मोहबत झलकती है
उसकी उन आँखों से मय छलकती है
सुना है कि टूटता है कहीं कोई तारा
जब वो अपने गेसू को झटकती है
इत्र भी तो शरमाये उसके सामने
वो हर लम्हा इस कदर महकती है
जला है माहताब भी उन रातों में
शबे रातों को जब राहों में चमकती है
देखूँ मैं भी वो नूर-ए-हुस्न कभी
मेरी आँखें जलने को भटकती हैं
-Rमन
