आज न छेडूं कोई भी तराना ये दिल नाशाद है मेरा
आज न माने कोई भी बहाना ये दिल नाशाद है मेरा
खोले हैं पन्ने कई से जिनमें ख़ुशबू हैं बहुत सी
आज न महके किसी से भी ये दिल नाशाद है मेरा
ये धीमे से सिसकता है हल्की सी आहें भी भरता है
फिर भी ये ज़ेहन पूछता है क्यूँ ये दिल नाशाद है मेरा
हैं ख़ुशियाँ जहां की ना कमी मुझे कोई आसमां की
फिर भी बस यूँही बेवज़ह ही ये दिल नाशाद है मेरा
रख लूँ मैं हाथ इस दिल पे ज़रा सा सहला लूँ नरम से
कि संभल जाए बेचारा जो ये दिल नाशाद है मेरा
-Rमन
