मोहब्बत का अंजाम ये होना ही था
तुझसे दिल जो लगाया तो रोना ही था
हल्की सी आहट पे भी टूटता है अब
अब इसे ख़ूनीं-जिगर होना ही था
बाँधा जो इश्क़ के नाम पे तूने मुझको
दिल के परिंदे को फ़रार होना ही था
तेरे हर रंग में तो मुझे रंगना ही था
तुझ सा बेवफ़ा तो मुझे होना ही था
ना देखुंगी पलट के कभी मैं तुझको
ज़िंदगी का वो पन्ना यूँ खोना ही था
-Rमन


