इतने तुम कामिल दिखते हो बोलो क्या दिल में छुपाये बैठे हो
इन गहरी सी नीली आँखों में बोलो क्या राज़ दबाये बैठे हो

कल तक तो तूफ़ाँ उफ़न रहा था अब चुप्पी बनाए बैठे हो
कहीं ऐसा तो नहीं अनजाने में कोई आस लगाए बैठे हो

वक्त अब नहीं मिलता तुम्हारा मसरूफ़ियत बनाये बैठे हो
क्या दुनियादारी की आड़ में अरमानों को दबाये बैठे हो

सज रहे हो खूब आज आँखों में काजल भी लगाये बैठे हो
दिन के नूर में क्या वो रातों को बहे आँसूं छुपाये बैठे हो

खुद अपनी मुलाकातों के चर्चे ज़माने में फैलाये बैठे हो करके खुद को बर्बाद क्यूँ किसी का यूँ दिल दुखाये बैठे हो