एक नीव विचारों का आदान-प्रदान करें,

मिट्टी का कर्ज थोड़ा चुकाने की कोशिश करें,

जननी है, "सह लेगी वो" ये गलती को आज सुधारने चलें। 

धरती ने जो शरण हमें दी है, उस स्थान का थोड़ा आदर करें। 

दूषण भी एक प्रकार का शोषण है, ये एहसास हम करें। 

करें आरती उस माँ की जिसने हमारी गलतियों को माफ़ कर दिया है,

सूरज की रोशनी का सदुपयोग करें, बिजली कम और सोलर सिस्टम का उपयोग करें। 

चलो आज विचारों का आदान-प्रदान करें। 

श्रृष्टि के सृजन में ही हमरा जीवन बुटी है,

इस बार धरती को थोड़ा विश्राम दे और खुद मेहनत करें।