दो पंख और कुछ उम्मीदें मुट्ठीभर लिये,
मैं चला,
उस धरती की तलाश में,
जहाँ लाशों का ढेर ना हो,
मौत का जश्न ना हो,
जहाँ दोस्ती का मोल ना हो,
प्यार का तोल ना हो,
जहाँ कदमों पे रोक ना हो,
जीने का टोक ना हो
एक पंख और कुछ उमीदें मुट्ठियों में लिये,
मैं चला...

