कुछ सपने आँखों में क़ैद

बोझ कन्धों पर लिये, 

मैं चला जा रहा हूँ  

कभी मेरी याद आये तो, 

कदमों के निशान छोड़े जा रहा हूँ 

गठरी मे कुछ कपडे और रोटियाँ लिए चल रहा था मैं 

किसी ने दूर से आवाज़ लगाई, 

भाई, कुछ नमकीन भी साथ ले जाओ,

मैंने कहा, अरे भाई चिन्ता ना करो, 

आँसू भी आपने साथ लिये जा रहा हूँ मैं 

कुछ स्वाद, कुछ एहसास छोड़े जा रहा हूं,

बारिश की बूंदें और कुछ मुस्कान दिये जा रहा हूँ

बोझ यादों का लिये, 

मैं आपने गाँव जा रहा हूँ।