एक दोस्त, जो मुझे बहुत अजीज थी I

वह मेरे और मैं उसके बहुत करीब थी II


कुछ नापाक लोगों से यह देखा न गया I

पाक दोस्ती का आइना चकनाचूर किया II


धीरे धीरे मतभेद इस कदर बढ़ने लगे I

गैर हुए पास और वो हमसे दूर हटने लगे II


आज वो गैर उनके खास अपनों में है I

और हमारी दोस्ती के नगमे अब पन्नों में हैं II


--रक्षा गुप्ता