उसने पूछा - मैं तुम्हारे लिए क्या हूं

मैंने कहा - तुम मेरे आसमां का वो तारा हो, जिसको मैं निहारना चाहती हूँ

तुम वो बारिश हो जिसमें मैं भीग जाना चाहती हूँ,

तुम वो खुशबु हो जिसकी महक मैं अपनी सांसो मे बसा लेना चाहती हूँ

तुम मेरी हर बातों मे होने वाला ज़िक्र हो, तुम मेरी बेवज़ह होने वाली फ़िक्र हो

तुम रात हो, दिन हो, सुबह और शाम हो मेरा

मैं हर बार थककर लौटूं वो घर हो तुम मेरा

वो जो कभी खत्म ही ना हो, वो सफ़र हो तुम मेरा