आंसुओं से
लिख दूं आंसुओं से पैगाम तेरे नाम
इश्क का ज़रा ज़रा आज उतार दूं
स्याही की हर बूंद में बना कर लहूं
लिख दूं आंसुओं से पैगाम तेरे नाम
भूल जा सजी मुस्कान को लवों पर
अब इश्क का पैगाम याद कर
लिख दूं आंसुओं से पैगाम तेरे नाम
तेरे दिए हर दर्द का हिसाब मेरे
आंसुओं में किस क़दर बस गया है
आज याद कर मेरी रूह से पूछ ले
लिख दूं आंसुओं से पैगाम तेरे नाम।
राखी सरोज
