मैं नारी......

हूँ मान , प्रतिष्ठा , सम्मान की प्यासी !

वो नर....

है अभिमान , पुरुषार्थ , अहम से पूरा तर !

फ़र्क केवल मात्राओं का ,

फिर भी अधूरा , अक्षम बिना मेरे तू नर !

 तेरी मुश्किल राहों को आसान बनाती हूँ ,

हाँ मैं नारी एक "माँ" बन जाती हूँ !

तुझे राजा भैया की उपाधि देती हूँ ,

हाँ मैं नारी एक "बहन" बन जाती हूँ !

तेरे सफर का एक साथी सच्चा बनती हूँ ,

हाँ मैं नारी तेरी "अर्धांगिनी" कहलाती हूँ !

नन्हे कदमों से तेरा घर रोशन कर देती हूँ ,

हाँ मैं नारी तेरी "बेटी" बन जाती हूँ !

मैं एक गोलाकार हूँ ,

हर वक्त तेरे आस पास रहती हूँ !

फिर भी मैं सम्मान की प्यासी हूँ !!!


~राखी लुक्कड़