मैं अकेला हूँ , अकेला ही रहूँगा,

ये शहर अमीरों का ही रहेगा,

मज़दूर हूँ भूखा, प्यासा रहूँगा,

इस शहर में मैं अकेला ही रहूँगा।


कभी खास हो जाता हूँ,

कभी नज़रंदाज़ कर दिया जाता हूँ,

मज़दूर हूँ मज़बूर ही रहूँगा,

इस शहर में मैं अकेला ही रहूँगा।


हर कदम पर सवाल है मेरा,

मज़दूर हूँ पर इतना क्यों मज़बूर हूँ,

प्रवासी हूँ इसलिये पलायन करूँगा,

इस शहर में मैं अकेला ही रहूँगा।


राजनेताओं के जुमले ने मुझे आत्मनिर्भर बनाया,

भौतिक वस्तुओं से मुझे अवगत कराया,

ईल्म से मुझे बहुत दूर कराया,

इस तरह मुझे मज़दूर से मज़बूर बनाया



~राखी लुक्कड़**