मैं सबला हूँ अब अबला नही ।

सीता जी कभी भी अबला नही थी उनका अपना फैसला था राम जी के साथ जाने का जबकि उनके पास बहुत से विकल्प थे लेकिन उन्होंने फ़ैसला लिया और स्वयं के अस्तित्व को खोजा ।

अग्नि परीक्षा एक मान था ,

जो की केवल सीता जी ही दे सकती थी अर्थात उनके धैर्य की कसौटी थी ।

जानकी जी की ताकत आप यह लगा सकते हैं कि शिव धनुष शक्तिशाली एवं विद्वान् रावण तक से नही उठा जिसे जानकी जी ऐसे ही उठा लेती थी। शक्ति और धैर्य में महान व्यक्तित से परिपूर्ण नारी हैं । ✍️