मैं भी फ़क़ीर हूँ इक गाँव का
मैं खानाबदोश हूँ इस शहर का
हर रोज़ पगडण्डी को नापता हूँ
पैरों में घाव सा कहर है इस शहर का
हर पहर अपनेपन को तरसता हूँ
ऐसा रैन बसेरा है इस शहर का
क्या खूब लिखा है "राखी" ने
काफ़िला लुटेरा है इस शहर का
-राखी लुक्कड़
#शहर


मैं भी फ़क़ीर हूँ इक गाँव का
मैं खानाबदोश हूँ इस शहर का
हर रोज़ पगडण्डी को नापता हूँ
पैरों में घाव सा कहर है इस शहर का
हर पहर अपनेपन को तरसता हूँ
ऐसा रैन बसेरा है इस शहर का
क्या खूब लिखा है "राखी" ने
काफ़िला लुटेरा है इस शहर का
-राखी लुक्कड़
#शहर