1 min read 788.5K reads

चाय पर आना , अल्फ़ाज़ों की कमी


ख़ामोश सी हो चली है इन दिनों ज़िन्दगी,लोगों का प्यार है मगर साथ नही ,

सामाजिक दूरी अब शब्दों में नमी है,"चाय पर आना" इन अल्फ़ाज़ों की कमी है।

— राखी लुक्कड़
Read more Earn more Learn more