ख़ामोश सी हो चली है इन दिनों ज़िन्दगी,लोगों का प्यार है मगर साथ नही ,सामाजिक दूरी अब शब्दों में नमी है,"चाय पर आना" इन अल्फ़ाज़ों की कमी है।
ख़ामोश सी हो चली है इन दिनों ज़िन्दगी,लोगों का प्यार है मगर साथ नही ,
सामाजिक दूरी अब शब्दों में नमी है,"चाय पर आना" इन अल्फ़ाज़ों की कमी है।