बेबाक़ है
मज़बूत भी
ज़िद्दी है
कमज़ोर नही
टूटी है
फिर भी आवाज़ में फ़र्क़ नही
रौद्र है
हुँकार भी
अस्मिता है
संस्कार भी
ना कभी रुकी है
ना रुकेगी
गलत को गलत
सही को सही कहेगी।
~राखी लुक्कड़


बेबाक़ है
मज़बूत भी
ज़िद्दी है
कमज़ोर नही
टूटी है
फिर भी आवाज़ में फ़र्क़ नही
रौद्र है
हुँकार भी
अस्मिता है
संस्कार भी
ना कभी रुकी है
ना रुकेगी
गलत को गलत
सही को सही कहेगी।
~राखी लुक्कड़