पापा! आपके होने से

नहीं डरता कुछ खोने से

जब तक आपका साथ है

सुकून मिलता है सोने से

मुसीबत सब खुद पर लेते हो

क्यूं वंचित रखते हो मुझे रोने से

हर ख्वाहिश पूरी करते हो मेरी

अपनी ख्वाहिशें क्यूं चिपकाई कोने से

मेहनत जो दिन-रात करते हो

औलाद पर कितना मरते हो

एहसास कैसा है जरा बताओ

औलाद खोने से कितना डरते हो

आप मेरी हिम्मत हो, पापा

वादा, रिहाई दूंगा बहुत जल्द

आपको ख्वाहिशों का बोझ ढोने से


~राकेश दुग्गल