वो चाहें इस जमीं को किसी नाम से बुलायें, मिट्टी की आवाज़ों को तो सुनना होगा

वो चाहें इस आसमां को भूल जायें, करोड़ों जिंदगियों के ख़्वाबों को तो सुनना होगा

यहां फिज़ा की रंगत बदलती है हर पहर, पत्तियां रोशनी के ताने बाने बुनती पल पल

वो जो सिर्फ इक निगाह भर देख ले ये कैफ़ियत, उनके अफ़सानों को तो सुनना होगा

ये मत भूलों यहां लोगों को कदम कदम पर लाचारियों ने धूल में मिलाया है

घर से बेघर होकर भी जो आसमां से नज़रे मिलाये, उनकी आवाज़ों को तो सुनना होगा

 यहां की सुबह गवाह हैं, हर युग में गंगा घाट पर संतों की भीड़ हुईं है

मज़हब के संसद में जो प्रेम के गीत सुनाये, उनके किस्सों को तो सुनना होगा

यहां धर्म की सीढ़ी, लोगों के आँगनों में उतरी है, जहां पूर्ण सत्य  बसता है

मदर टेरीसा, विवेकानंद ने हर चेहरे में खुदा का नूर देखा है, उनकी इबादतों को तो सुनना होगा