मौसम ने करवट ली है, क्या आज दिलों की सुन लूं
बहारों ने की है इबादत, क्या आज फूलों की सुन लूं
ये आशियां सो रहा है कब से सुबह की रोशनी में नहाया
घुटती सांसों ने की है कुछ बात, क्या आज खामोशियों की सुन लूं
वो चले गए तपती दोपहर में, शाम का इंतजार तो किया होता
यादों ने किया है तकाजा, क्या आज धड़कनों की सुन लूं
वो डालियों पर हंसते सफ़ेद सितारे, वो धरती से जुदा निर्मोही पत्तियां
लाखों गुलों की उमंगो ने किया है मलाल, क्या आज रिश्तों की सुन लूं
वो सड़कों पर बिछड़ती कसमें , वो वादे, वो गंगा में बहते अधूरे इरादे
सहमे हुए चेहरों ने किया है सवाल, क्या आज उन सवालों की सुन लूं


