केसरिया बालम पधारो म्हारे देस’
नयना पुलकित, फिर उर में कैसी ठेस
कैसी झूमी घर आंगन, अमिया की बौर
मन की सुनी कभी न, सावन को नही ठौर
मुंडेर पर भोर बुलावे, दुनिया को रात दिन शोर
दोपहर किरकिराये कजरा सी, शाम खींचे डोर
पिया प्यारी पग पग भटकी, कैसे जानू मीत
‘आंबा मीठी आमरी,’ चाहूं अमृत जैसी प्रीत
मांगू न कंगना, मांगू न चंद्रहार, मांगू नई रीत
न मांगू ‘रन मीठी तलवार’, मांगू प्रेम के गीत


