अब यहां प्यार की क़समे खाना बेमाने लगता है
अब यहां दिल की बातें बताना बेमाने लगता है
सोचते हैं लोग, शीशे में यादों का वज़ूद भी मिटा देंगे
अब यहां पुरानी बातों को दोहराना बेमाने लगता है
रोशनी से दुश्मनी हमेशा रही है, अंधेरों के राहगीरों की
अब यहां स्याह राहों में चिराग़ जलाना बेमाने लगता है
सनातन धर्म सोच है, प्रेम की डोर थामे इक सभ्य समाज की
अब यहां भीड़ को भाईचारे के पाठ पढ़ाना बेमाने लगता है
आँगनों को राख कर, बस्तियों को उजाड़ कर, राष्ट्र नही, सिर्फ जागीरें बनती हैं
अब यहाँ गंगा जमुना जलती देख समुंदर के सपने दिखाना बेमाने लगता है
