काव्य लेखन के जीवन के रंगमंचपर जहां लोगों के किरदारदो मुंहां सांप की भाती हैउन्हें खुद भी पता नहींचलता त्रिया चरित्र दिखानेवाली का अगला दृश्य उसकेपरिवार के लिए कितनाअपत्तिजनक होगा।राकेश पाण्डेयकाव्य कठाक्षरचनाकार
काव्य लेखन के जीवन के रंगमंच
पर जहां लोगों के किरदार
दो मुंहां सांप की भाती है
उन्हें खुद भी पता नहीं
चलता त्रिया चरित्र दिखाने
वाली का अगला दृश्य उसके
परिवार के लिए कितना
अपत्तिजनक होगा।
राकेश पाण्डेयकाव्य कठाक्षरचनाकार