बेशक तुने मेरे जीवन में मौत
का पल लिख दिया पर न जाने
क्यों.मेरी आत्मा आज भी चारों
तरफ वहीं तेरा पुराना दिल खोजती
तुने बेशक अपने दिल से मुझ पर
हमला करवा भुला दिया
पर आज भी में तेरे निसां न मिटा सका
क्योंकि तेरें साथ बिताए उन पलों को
मेरा दिल आज भी ढूँढ़ता
जहां हर पल तुझसे रौशन था
मेरें दिल का समां
राकेश पाण्डेय
काव्य रचनाकार


