दुश्मन की नियत खोटी
हमने विजय कर ली
करगिल की हर इक चोटी
घर लौट के आ माइया
जंग तो ख़त्म हुई
क्यों रूठ गया माइया
बन धूलि उङे बादल
रण को चले योद्धा
ज्यूं उमङ पङे बादल
क्या खूब कहानी है
अमर शहीदों की
पुर-नूर जवानी है
सम्मान रहे पाता
ख़ून शहीदों का
बेकार नहीं जाता
© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'


