उङी चुनरिया प्यार की, अम्बर धरती गाय।

होली खेलन को सखी, सांवरिया हैं आय।।


मनहर, कान्हा, सांवरा, सब के मन को भाये।

रंग फैंकें सब गोपियां, कान्हा खेल रचाये।।


छाई होली की छटा, फूल खिले चहुं ओर।

सजी रंगों से है धरा, केसरिया है भोर।।


होली नूर वसंत का,होली मोज बहार।

होली हर सू प्यार के, रंगों का त्योहार।।


© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत