नमन दोहा रचनाकार मंच

दिनांक 01 जुलाई 2021

प्रदत्त शब्द: नसीब



अंधियारी रातें सहीं, दुखङे सहे अजीब।

आई भोर सुहावनी, खुलने लगे नसीब।।


#राकेशनुदरत© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'