चले युंही संसार, यही है आना जाना।

कहीं दुखों का भार, कहीं सुंदर अफ़्साना।

युंही ढलेगी शाम, युंही है भोर का आना।

आज कहानी खास, कभी था जो याराना।।


© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'