घर घर में नवरात्रे, लगे हुए दरबार।
बीमारी, दुःख दूर हों, जग का हो उद्धार।।
जय माता दी बोलते लगे हुए दरबार
जगराता कर रात भर, मांगें मां से प्यार
बीमारी फैली यहां, मची है हाहाकार।
संकट की इस घङी में, नाव लगा दे पार।।
© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'


घर घर में नवरात्रे, लगे हुए दरबार।
बीमारी, दुःख दूर हों, जग का हो उद्धार।।
जय माता दी बोलते लगे हुए दरबार
जगराता कर रात भर, मांगें मां से प्यार
बीमारी फैली यहां, मची है हाहाकार।
संकट की इस घङी में, नाव लगा दे पार।।
© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'