दुःख दर्द इस जहान के हमको न कम मिले

बढ़ते गये हैं हौसले जब जब भी ग़म मिले


दुनिया के बंधनों को रिवाजों को तौङ कर

ले कर दिलों में प्यार का तूफ़ान हम मिले


तुम को रहूं निहारता हर इक जन्म में मैं

सौग़ात हुस्न की ये तुम्हें हर जनम मिले


पंछी भी चहचहाये हैं ख़ुशियां मनाये हैं

मुझको भी इन फ़िज़ाओं में मेरा सनम मिले


रस्ता बनाये जाये हैं बढ़ते ही आये हैं

पग पग पे हमको राह में दुःख, दर्द ग़म मिले


© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'