कोरोना का काल हैं दूषित हुई हवायें।

मानव है नादान है करता रहे ख़तायें।

जग में फैले प्यार करें हम यही दुआयें।

स्वस्थ बने संसार चलें फिर शुद्ध हवायें।।


© राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'